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आईएमएफ ने इस वर्ष भारत की विकास दर का अनुमान बढ़ाकर 12.5% किया

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने मंगलवार को वित्त वर्ष 2021-22 के लिए भारत की विकास दर का अनुमान बढ़ाकर 12.5 प्रतिशत कर दिया है। हाल ही में जारी वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट में आईएमएफ ने कहा, भारत का सकल घरेलू उत्‍पाद 12.5% रहेगा, जो वर्ष 2021 जनवरी में प्रकाशित पिछली रिपोर्ट में जारी विकास दर की तुलना में 1 प्रतिशत अधिक है। आश्चर्यजनक बात ये है कि यह दर चीन की विकास दर के मुकाबले भी अधिक होगी। 
 

भारत में तेज टीकाकरण अभियान का असर आने वाले दिनों में भारत की विकास दर में दिखेगा

बता दें, चीन दुनिया की एकमात्र बड़ी अर्थव्यवस्था रहा है, जिसकी विकास दर 2020 में कोरोना महामारी के दौरान भी सकारात्मक रही।आईएमएफ ने अनुमान लगाते हुए कहा है, भारत में तेज टीकाकरण अभियान और कोरोना से स्वस्थ होने की दर अन्य देशों के मुकाबले काफी अच्छी है, जिसका परिणाम आने वाले दिनों में भारत की विकास दर में स्पष्ट रूप से देखने को मिलेगा।
 

2022 में भारत की वृद्धि दर 6.9% रहने का अनुमान

आपको बता दें, अमेरिका के वाशिंगटन शहर में स्थित आईएमएफ ने अगले वित्तीय वर्ष 2022 के लिए भारत की वृद्धि दर 6.9% रहने का अनुमान जताया है। आईएमएफ ने दावा किया है कि वित्त वर्ष 2021-22 में भारत की मुद्रास्फीति घटकर 4.9% रह जायेगी।
 
आईएमएफ में मुख्य अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ ने कहा, "हम अब अपने पिछले पूर्वानुमान की तुलना में वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए 2022 और 2021 में एक मजबूत रिकवरी का अनुमान लगा रहे हैं, जबकि 2021 में विकास 6 प्रतिशत और 2022 में 4.4 प्रतिशत होने का अनुमान है।" जैसा कि हमें मालूम है 2020 में वैश्विक अर्थव्यवस्था में 3.3 प्रतिशत की गिरावट आई थी।

महामारी से आर्थिक नुकसान की संभावना अभी भी कायम

आगे रिपोर्ट में वो कहती हैं, "देश के स्तर पर और वैश्विक स्तर पर अर्थव्यवस्था के सामने अभी भी कई चुनौतियां हैं और महामारी से आर्थिक नुकसान की संभावना अभी बनी हुई है”। रिपोर्ट के अनुसार, 2020 में 3.3 % के अनुमानित संकुचन के बाद, 2021 में वैश्विक अर्थव्यवस्था के 6% पर बढ़ने का अनुमान है, जो 2022 में 4.4% तक रहेगी। 

अक्टूबर 2020 के विश्व आर्थिक आउटलुक (WEO) के अनुमान के मुताबिक 2020 के लिए संकुचन 1.1% रहा, जबकि उम्मीद इससे ज्यादा संकुचित होने की थी, क्योंकि तालाबंदी के बाद अधिकांश क्षेत्रों में ढील दी गई थी। इससे अर्थव्यवस्थाओं को अनुकूल काम करने का अवसर मिला। इसी का नतीजा रहा की वर्ष की दूसरी छमाही में वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुधार देखने को मिला।

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